ड्रोन की मदद से कृत्रिम बारिश करवाने का देश में यह पहला प्रयोग है: 12 और 18 अगस्त की कोशिशें नाकाम रहीं
ड्रोन की मदद से कृत्रिम बारिश करवाने का देश में यह पहला प्रयोग है: 12 और 18 अगस्त की कोशिशें नाकाम रहीं
✍️ लेखक: VHub9
🌧️ राजस्थान में ड्रोन से कृत्रिम बारिश का अनोखा प्रयोग
राजस्थान के जमवारामगढ़ स्थित रामगढ़ बांध में देश का पहला ड्रोन आधारित क्लाउड सीडिंग प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। यह प्रयोग भारत में अपनी तरह का पहला है, जिसमें ड्रोन की मदद से बादलों में रसायन छिड़ककर कृत्रिम बारिश करवाने की कोशिश की जा रही है। लगातार सूखे की मार झेल रहे इस क्षेत्र में यह तकनीक उम्मीद की एक नई किरण लेकर आई है।
🚁 10,000 फीट तक ड्रोन उड़ाने की मिली अनुमति
इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने 10,000 फीट तक ड्रोन उड़ाने की अनुमति दे दी है। पहले सिर्फ 400 फीट तक ही उड़ान की इजाजत थी, जिससे प्रभावी क्लाउड सीडिंग संभव नहीं हो पा रही थी। अब एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से NOC मिलने का इंतजार है, जिसके बाद उड़ान का समय तय किया जाएगा।
🤝 विदेशी तकनीक और स्थानीय पहल का मेल
इस प्रोजेक्ट को कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा की पहल पर अमेरिका और बेंगलूरु की टेक्नोलॉजी कंपनी Gen X AI के साथ मिलकर कृषि विभाग चला रहा है। हाल ही में केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री से भी इस संबंध में मुलाकात की गई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह तकनीक समय पर लागू हो जाती है, तो रामगढ़ बांध में पानी की कमी को काफी हद तक दूर किया जा सकता है।
❌ शुरुआती प्रयासों में मिली असफलता
हालांकि, इस प्रयोग की शुरुआत कुछ चुनौतियों से भरी रही।
- 12 अगस्त को पहली बार ड्रोन उड़ाया गया, लेकिन भारी भीड़ के कारण GPS सिस्टम ने काम करना बंद कर दिया।
- 18 अगस्त को दोबारा ट्रायल किया गया, लेकिन ड्रोन कुछ ही देर में नियंत्रण से बाहर हो गया और पास के खेत में जा गिरा।
इन असफलताओं के बावजूद, परियोजना से जुड़ी टीम और विशेषज्ञों का उत्साह बना हुआ है। तकनीकी सुधारों और बेहतर योजना के साथ आने वाले समय में यह प्रयोग सफल हो सकता है।
🌱 भविष्य की उम्मीदें
क्लाउड सीडिंग तकनीक अगर सफल होती है, तो यह न केवल राजस्थान बल्कि देश के अन्य सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है। ड्रोन तकनीक के साथ मौसम विज्ञान और कृत्रिम वर्षा का यह संगम भारत में जल संकट से निपटने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।
अगर आपको यह विषय रोचक लगा, तो मैं और भी ऐसे विज्ञान और तकनीक से जुड़े लेख आपके लिए तैयार कर सकता हूँ। बताइए, अगला विषय क्या हो? 😊

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